आपकी कोई निंदा करें तो – Aapakee koee ninda karen to

अगर कोई हमारी निंदा करता है तो एक आम आदमी की प्रतिक्रिया जो होती है वही होती है जैसे कि गुस्से में आकर के उसको जवाब देना।

गुस्से में आकर के जवाब देना वही हमारी सर्वप्रथम प्रतिक्रिया होगी उसके बाद अगर प्रतिक्रिया होने के बाद अगर सब कुछ सही रहा तो बात धीरे-धीरे ठंडी हो जाएगी और शांत हो जाएगी।

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लेकिन अगर हमारी प्रतिक्रिया देने के बाद महात्मा टावर और भी गर्म रहा तो बात और भी बढ़ेगी और वह बात बढ़ते बढ़ते एक झगड़े का स्वरूप धारण कर लेगी।

कुछ बातें या कुछ नींद आए ऐसी होती है जो हमारे अपने मूड के ऊपर भी होती है जो अगर हमारा मूड अच्छा होता है तो उसको इग्नोर करके छोड़ देते हैं या फिर उसको हम हंसी देखे भूल जाते हैं।

लेकिन कहीं अगर हमारा मूड खराब है और हमारी कोई निंदा करते तो हमें उन पर बहुत गुस्सा आता है और अगर एक बार इंसान को गुस्सा आ गया तो वह उसको खुद को पता नहीं होता है कि वह गुस्से में क्या क्या कर रहा है और वह गुस्सा करके पता नहीं अपना ही क्या-क्या नुकसान कर बैठेगा।

और एक बात यह होती है निंदा की प्रतिक्रिया देने के लिए अगर वह इंसान किसी भी परिस्थिति वश किसी भी मजबूरी वश शांत है अगर उसको सामने वाले इंसान की जरूरत है तो भी उसको किसी भी हिसाब से उसकी प्रतिक्रिया नहीं देगा यानी कि उसको जवाब नहीं देगा क्यों क्योंकि उसको सामने वाले इंसान से अपना काम निकलवाना है।

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यह जो शांत रहने वाले व्यक्ति हैं वह अपना काम निकलने के बाद हमने जो ऊपर दो तरह के लोग देखे उससे भी ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि अपना काम निकलने के बाद वह खुद के मन के राजा होते हैं और वह उस निंदा क्या इतना तगड़ा जवाब देते हैं कि वह इस बात को जिंदगी भर याद रखें और जीवन में आगे कभी भी किसी की निंदा ना करें।

वैसे तो हमें हमारी निंदा का प्रतिक्रिया निंदा के ऊपर से ही डिसीजन लेना चाहिए कि वह निंदा सही में हमारी है या नहीं है कई बार तो लोग सिर्फ हमारी मजाक बनाने के लिए निंदा करते हैं और कई बार ऐसा होता है कि हमें हमारी कोई कमजोरी बता रहा होता है वह वह हमें निंदा लगती है।

अगर वह हमारी सच में कमजोरी है तो हमें उसको हमें नींद आ के रूप में नहीं देखना चाहिए हमें उस को हमारी कमजोरी है ऐसा सोच समझकर उसको कैसे सुधार करें उसको कैसे ठीक करें और आगे से कभी ऐसी प्रॉब्लम्स का सामना ना करना पड़े और ना फिर कभी हमारी कोई ऐसे निंदा करें उस बात का संपूर्ण विधि से ध्यान रखना चाहिए।

कुछ लोगों की प्रतिक्रिया ऐसी होती है कि जो निंदा करने वाला है वह भी उसका दीवाना हो जाता है जैसे कि उसको उस निंदा को एक जोक्स के रूप में उसको एक्सेप्ट करता है और वह उसी की निंदा को और कुछ कमियों को ऐड करके उसको एक जोक्स के रूप में सबके सामने रखता है।

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इससे यह होता है कि हमको कभी गुस्सा नहीं आता और हमारी बात को हम प्यार से एक्सेप्ट भी कर लेते हैं और सामने वाले को यह भी फील नहीं होता कि इसमें हमारी निंदा को में कहा है लेकिन हमें बुरा नही लगा है।

जिस भी इंसान के अंदर यह कला होती है वह अपनी निंदा उसे बचके रहता है क्योंकि उसको उस निंदा का कैसे जवाब देना है वह बहुत अच्छी तरीके से जानता है और उसको लोगों के साथ अनबन भी बहुत कम होते हैं।

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ऐसे इंसान को जीवन में अगर निंदा करने वाले की जरूरत भी पड़ती है तो वह उसके सामने बिना हिचकिचाहट के सामने मदद मांगने जा सकता है और वह निंदा करने वाला भी उसकी मदद करने के लिए बिना कुछ सोचे समझे आगे आकर खड़ा हो जाता है और वह पूरे दिल से उसकी मदद करता है।

क्योंकि वह यह बात जानता है कि पिछली बार मैंने इस इंसान की निंदा की थी पर फिर भी उसने मुझे गलत कोई भी शब्द नहीं कहा था ऊपर से इस बात को हंसकर निकाल दिया था तो वह उसको बहुत अच्छा लगा था।

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