अच्छे लोग ही दुखी क्यों होते है – achchhe log hee dukhee

मैंने दिन में एक बार तो यह जरूर किसी के मुंह से सुना है कि, अच्छे लोग ही क्यों दुखी होते हैं क्या उन पर भगवान को तरस नहीं आता।

दुख बहुत सारे मिलने की वजह से कुछ लोग तो भगवान पर भी शक करने लगते हैं कि सच में अगर इस दुनिया में भगवान है तो इस दुनिया में इतना सारा दुख क्यों है?

मेरे साथ ऐसा क्यों होता है

कभी कभी तो शक भी करते हैं क्योंकि उनको हकीकत पता ही नहीं होती। उनको सिर्फ भगवान का ही पता होता है अपने कर्मों के हिसाब किताब का कुछ भी पता नहीं होता है।

क्या भगवान ने अच्छे लोगों को ही सारा दुख देना है ऐसा निश्चय कर रखा है और बाकी पापियों को सुख देना यही सोच रखा है। आखिरकार ऐसा क्यों होता है। भगवान ऐसा क्यों करते हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं जो यह नहीं जानते हैं कि अच्छे लोग ही क्यों दुखी होते हैं।

सुख और दुख में क्या अंतर है

साफ और स्पष्ट बात यह है कि दुखी होना यह कोई बड़ी बात नहीं है। जीवन में हर किसी के अपने-अपने हिसाब किताब होते हैं।

अगर आपने किसी को सुख दिया है तो आपको सुख मिलेगा अगर आपने किसी को दुख दिया होगा तो आपको दुख ही मिलेगा। इसमें हम किसी और को दोष देकर के किसी को दोषी नहीं ठहरा सकते।

यह मनुष्य जीवन बहुत अमूल्य है हमें इसी जन्म में लोगों की मदद करनी है अगर हम किस की मदद कर सकते हैं तो अवश्य करें।

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दुःख का मूल कारण क्या है

क्योंकि अगर हम किसी की मदद करेंगे तो कभी कोई हमारी मदद करेगा अगर हमारी कोई मदद करेगा तो हम हैं जो दुख मिलने वाला होता है वो हम दुख से बच सकते हैं।

जैसे कि हमें पैसे की जरूरत है और उसी समय हमें कोई आकर पैसे देकर कोई मदद करता है तो हम पैसों की जो समस्या थी वह समस्या हमारे लिए अभी हल हो चुकी है।

जो इंसान जैसा कर्म करता है उसको वैसा ही फल मिलता है।

कुछ लोग तो सिर्फ धर्म की राह पर चलते हैं भगवान का नाम लेते हैं भगवान का भजन कीर्तन आदि सब करते है फिर भी उनके जीवन में दुख ही दुख होते हैं और कुछ लोग खराब ओर गलत काम करके याने की शराब और जुआ खेल खेल के भी अपने घर के अंदर झगड़े करके भी अपने जीवन में खुश रहते हैं। उनके सामने कभी कोई दुख नहीं आता है। यह सोचकर भी या यह देखकर भी हमारे दिल में ख्याल आता है कि अच्छे लोग ही क्यों दुखी होते हैं।

संसार में दुख का कारण

सुख-दुख हमारे जीवन की एक गाड़ी है। अगर यह गाड़ी ठीक-ठाक चलती रहेगी तो हमें दुख का एहसास भी कैसे रहेगा। अगर दुख ही नहीं होगा तो सुख को भी हम कैसे पहचानेंगे। इसीलिए सुख की कीमत परखने के लिए दुख का एहसास होना जरूरी है।

जीवन में सुख ही सुख होगा तो सारी चीजें आसानी से मिल जाएगी और दुःख होगा तो चीजों को पाने के लिए हमें खूब मेहनत करनी पड़ेगी। और सिर्फ मेहनत ही नहीं उसके साथ साथ ईमानदारी से जीना पड़ता है।

खास करके देखा जाए तो जो लोग इमानदारी से जी रहे हैं वह लोग चैन और सुख से नहीं जी पा रहे हैं और जो लोग दो नंबर का काम करते हैं यानी कि काम चोरी करके या कोई गलत काम करके पैसा कमा रहे हैं वह लोग खूब सुखी है।

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उनके पास दुनिया की सारी सुख सुविधाएं हैं। वह लोग बिल्कुल भी दुखी नहीं है। तो ऐसे लोगों को देख कर के तो हमें बिल्कुल ही मन में फील होगा कि अच्छे लोग ही क्यों दुखी होते हैं। यह सवाल भी जायज है। ऐसा हमें फील जरूर होता है।

लेकिन एक बात मैं आपको बता दूं कि जो लोग गलत काम करके पैसे कमाते हैं, अधर्म की राह पर चलकर पैसे कमाते हैं वह लोग हमारे हिसाब से तो आराम से सो रहे लेकिन उनके दिल में क्या चल रहा होता है वह तो सिर्फ वही जानते हैं।

क्या आपको पता है उनको सोने के लिए रात को नींद की गोली खानी पड़ती है। क्या आपको पता है उनके अंदर कुछ अधूरा सा फील होता है। क्या आपको पता है वह हर रोज रात को आपके जितनी गहरी नींद से नहीं सोते हैं मतलब की जितनी गहरी नींद में आप सोते हो इतनी गहरी नींद में कोई भी वह लोग नहीं सोते उन सब के दिलों दिमाग में कुछ ना कुछ टेंशन रहती है।

अच्छे लोग दुखी क्यों रहते हैं

जब आप अच्छा सोचते हो तब आप अच्छा बन रहे होते हो और जब आप कुछ गलत सोचते हो तब आप नेगेटिव बनने की कोशिश कर रहे होते हो।

हमारे जीवन में हर एक चीज का समय निश्चित होता है। ठीक ऐसे ही हमारे जीवन में जो गलत समय होता है उसकी भी एक निश्चित सीमा है। जब वह समय खत्म हो जाएगा उसके बाद हमारे पास अच्छा समय आएगा और उस अच्छे समय का हमें संपूर्ण सदुपयोग करना है।

जीवन में किसी भी परिस्थिति में सुख पाने के लिए सब से रिश्ता अच्छा रखना जरूरी है। देखना ही है तो सबके अंदर की अच्छा ही देखो बुराई नहीं क्योंकि बुराई देखोगे तो उनके प्रति नेगेटिव थिंकिंग शुरू हो जाएगी।

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