दुख दूर करने के रामबाण उपाय – dukh door karane ke raamabaan upaay

दुख दूर करने के रामबाण उपाय – दुख हमारे जीवन का एक ऐसा पहलू है जो कभी आता है और कभी जाता है। जैसे कि रात और दिन। वह हमेशा आते जाते रहते हैं। ठीक ऐसे ही मनुष्य जीवन में दुख भी आते जाते रहते हैं। आज के इस समय में हर कोई ढूंढ रहा है हर कोई दुखी है किसी ना किसी कारण से।

हर एक मनुष्य दुख से बहुत दुखी है और उसी दुख से छुटकारा पाने के लिए उसके इलाज ढूंढता रहता है जैसे कि

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दुखी होने से बचने के लिए हमें जीवन में कुछ बातें ऐसी है जिसको हमें ध्यान रखना है और हमारा जीवन हमें जीना है।

दुख से बचने के लिए हमने जीवन के अनुभव में से मुख्य 5 बातें निकाली है. जिससे हमें दुख को समझने में आसानी रहेगी कि हमारे जीवन में कैसे आता है ?

1.सदा खुश रहे

मैं मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं मैं बहुत अच्छी तरह से जानता हूं कि सदा खुश रहना यह कोई छोटी बात नहीं है यह सिर्फ कहने के लिए अच्छा लगता है। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है अगर हम कोशिश करेंगे तो खुश रह सकते हैं।

दुख को कौन पसंद करता है? दुख किस के जीवन में नहीं है?

आज के समय में हर एक इंसान अपने निजी कारणों के साथ दुखी हुआ है। कोई भी इंसान दुखी होना नहीं चाहता वह किसी कारणवश ही दुखी होता है। दुखी होना भला किस को अच्छा लगता है?

दुख दूर करने के लिए अर्थात दुख दूर करने के रामबाण उपाय अगर आप देख रहे हो तो, उस में से सबसे पहला पॉइंट है कि जितना हो सके खुद खुश रहने की कोशिश करें। अगर खुद खुश रहेंगे तो हम से मिलने वाले हर एक व्यक्ति भी शायद खुश हो सकते हैं।

 

अब आप यह कहेंगे कि खुश कैसे रहें तो उसका जवाब यह है कि आप हमेशा खुद के लिए भी और दूसरों के लिए भी अच्छा सोचे सब के फायदे की बात ही सोचे तो आपके जीवन में दुख की बातें बहुत ही कम आने लग जाएगी और जैसे-जैसे आप इस बात का अभ्यास करेंगे आपको स्वता ही अनुभूति होने लग जाएगी।

अगर आप किसी का बुरा करने की सोचेंगे या किसी के लिए नुकसान वाली बात सोचोगे तो बेशक आपके साथ ही कुछ बुरा ही होने वाला है तो बुरा होगा तो हम दुखी हो जाएंगे है ना? तो हमें दुखी नहीं होना है हमें सुखी होना है तो सुखी होने के लिए सबसे पहले हमारी सोच को बदलना है। सोच को सकारात्मक बनाना है।

ठीक इसी बात पर एक कहावत भी है कर भला तो होगा भला।

इसीलिए हम जितना सबका भला करेंगे उतना ही हमारा भला होगा और अगर आपको ऐसा लगता है कि हमने तो सब का भला किया लेकिन हमारा कोई भला नहीं करता है तो आप चिंता मत करिए।

जिसका कोई भला नहीं कर सकता उसका खुद भगवान भला करता है तो आप अपने भले की चिंता मत कीजिए आप सिर्फ किसी को सुख कैसे पहुंचाए उसके बारे में सोचिए फिर आप दुखी नहीं होंगे।

 

2.जरूरत से ज्यादा सोचना

कई लोगों को ऐसा देखा होगा कि किसी भी छोटी सी बात को लेकर बहुत चिंतित हो जाते हैं। कोई छोटी सी समस्या को लेकर खूब चिंता करते रहते हैं। तो उनको मैं यह याद रखना है कि जिस समय जो बात होनी है वह बात होकर रहेगी।

हमारे सोचने से कोई फर्क नहीं पड़ता है हां अगर फर्क पड़ता है तो हम उसको थोड़ा बचा सकते हैं लेकिन 70% बातें ऐसी होती है जिस पर हमारे सोचने से कोई फर्क नहीं पड़ता कुछ समस्या ऐसी होती है जिसको हमें सिर्फ स्वीकार ही करना होता है उसके अलावा कुछ भी नहीं। वह कहते हैं ना कि होनी को कोई नहीं टाल सकता। ठीक ऐसी ही बात है अगर जब पता ही है कि यह होकर ही रहेगा तो हमें क्यों उसके बारे में सोचें?

किसी भी एक चीज को बार बार सोच के हम सिर्फ और सिर्फ दुखी होते हैं उसे कभी हम सुखी नहीं होते। और जब हम दुखी होते हैं तो हमें देख कर हमारे परिवार वाले भी दुखी होते हैं उनको भी कहीं भी कोई भी जगह मन नहीं लगता है सारा परिवार का वातावरण पूरा बेकार हो जाता है।

 

3.स्वभाव परिवर्तन

स्वभाव को परिवर्तन करना अर्थात स्वभाव को बदलना यह भी सबके लिए बहुत बड़ी बात है क्योंकि यह चीज है जब इतने समय से चली आ रही है तो उसको एक झटके में बदलना आसान नहीं है।

स्वभाव परिवर्तन के लिए हमें हमारे जीवन में एक-एक करके चोटी चोटी आदतों को हमें अपने अंदर धारण करना होगा उसके बाद धीरे-धीरे अपने स्वभाव में परिवर्तन आता जाएगा।

जैसे कि कम बोलना है, धीरे बोलना है, मीठा बोलना है। यही सब चीजें हैं जो हमें हमारे जीवन मैं उतरनी हैं। इसे हम धीरे-धीरे उतारेंगे तो 1 दिन हमें हमारे जीवन में स्वभाव परिवर्तन करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी।

4.मदद करना

मनुष्य जीवन में अगर इंसान दुखी होता है यह आम बात है लेकिन उसी दुख के समय में उसका कोई रिश्तेदार या उसका कोई दोस्त उसकी मदद करने आ जाता है तो उसको इतना दुख नहीं लगता जितना उसको बिना मदद के लगता।

अगर हम किसी भी इंसान को किसी भी रूप से मदद करते हैं तो हमारी भी मदद किसी ना किसी रूप से भगवान करता ही है यह शायद आपको भी अनुभव होगा। क्योंकि मदद करने से एक समय के लिए सामने वाले के दुख में बहुत फर्क पड़ता है और कई लोग ज्यादा दुखी होने की वजह से कुछ गलत कदम भी उठा लेते हैं जैसे कि आत्महत्या करना, जैसे कि ट्रेन के नीचे आ जाना आदि इत्यादि।

 

5.इच्छा

मनुष्य कई बार अपने जीवन में अपनी इच्छाओं की वजह से दुखी होता है। क्योंकि वह अपने दिल में ऐसी इच्छा वह जगह देता है जो वह पूरा करने में सक्षम नहीं है फिर भी वह उसके लिए सपने देखता रहता है कि कभी यह मेरा सपना पूरा होगा।

किसी भी सुख के सपने देखना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन सपने भी हमें हमारे हिसाब से देखनी चाहिए क्योंकि हमारी इच्छा है हम ही पूरी करनी है और हम क्या कर सकते हो और क्या नहीं यह हम ही जानते हैं।

इसीलिए हमारी जो इच्छा है वह भी हमें सोच समझकर करनी है कहीं ऐसी कोई इच्छा नहीं करनी है जिसको हम कभी पूरा ही ना कर सके और उसी को सोच कर फिर बार-बार दुखी होते रहे। इसी तरह अपनी इच्छाओं पर कंट्रोल करके आप अपने जीवन में दुखों को निकाल सकते हो।

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