इंसान इतना घमंड क्यों है – Insaan itana ghamand kyon hai

आजकल की बात की जाए तो इंसान घमंडी तो है ही लेकिन सारे नहीं है। जिसके पास ज्ञान है वह तो घमंड में आ ही जाता है लेकिन ऐसे बहुत से लोग आपने भी देखे हुए कि जिस जिसके पास ज्ञान सिर्फ नाम मात्र है और घमंड तो पूरी दुनिया का लेकर घूमते रहते हैं।

किसी भी इंसान को अगर एक ही काम को बार-बार करते हुए कुछ साल लग जाते हैं तो उस इंसान को उस काम करने में कुशलता जाती है यानी कि अनुभव हो जाता है।

घमंड की परिभाषा

वह उसका मास्टर व्यक्ति है। उस काम को किसी ना किसी तरह से उसको सुधार ही देता है और इसलिए उसको मास्टर कहा जाता है लेकिन और वह मास्टर लोगों की नजरों में घमंडी इंसान साबित हो जाता है।उसे अनुभव की वजह से वह उस काम के लिए मास्टर के नाम से जाना जाता है वह इसीलिए क्योंकि उस काम को अगर किसी भी तरह से कोई नहीं बिगाड़ दिया है और उसको ठीक कर सकता है।

लेकिन अनुभव तो सबके पास ही होता है सबके पास अपना एक यूनिक अनुभव होता है लेकिन सब के सब घमंडी नहीं होते। यह कोई कहे कि सब घमंडी होते हैं तो यह बात सच नहीं है।

घमंड को कैसे दूर करें

घमंडी अगर कोई इंसान बनता है तो उसके पीछे भी उसके कुछ कारण होते हैं जैसे कि अगर किसी एरिया में जैसे कि राशन की एक ही दुकान है और दूर-दूर तक राशन की और कोई भी दुकान नहीं है तो उस एरिया के लोग सभी उस एक ही दुकान के ऊपर निर्भर करते हैं और सभी उसके पास से ही राशन खरीदते हैं।

तो यह बात जो राशन की दुकान वाला है उसके दिमाग में फिट हो चुकी है कि यहां के इस एरिया में मेरी दुकान के सिवाय और कोई भी राशन की दुकान नहीं है इसीलिए सब मेरी दुकान से सामान खरीदने के लिए आएंगे। और कही से भी वह सामान खरीद के नहीं ला सकते हैं।

और दुकानदार इस बात का संपूर्ण रूप से फायदा उठाते हुए अपने दुकान के सामान्य ज्ञान कीमत भी मन मुताबिक रख सकता है जैसे कि किसी चीज की कीमत पूरे मार्केट में कम है और उसके वहां हैं वह सिर्फ ज्यादा क्यों मत ले सकता है तो यहां से भी हम यह कह सकते हैं कि वह घमंडी है और उसको अपनी दुकानदारी का भी अकड़ है।

आदमी का घमंड

लेकिन एक इंसानियत के नाते हमें किसी को इतना मजबूर नहीं करना चाहिए कि वह हमारे से ही सामान खरीदें यानी कि हमें ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे सामने वाले को हमारी कमी का बाद में भी कोई एहसास ना हो जैसे कि अगर उस दुकान के साथ में कोई और दुकान खो जाए तो उस दुकान वाले की कोई कीमत नहीं रहेगी यानी कि थोड़ी बहुत कम हो जाएगी।

मानव में घमंड कब आता है ?

और फिर वह अपने मन का भी किसी भी चीज का मूल भाव बदल नहीं सकता अगर बदलेगा तो ग्राहक उसकी दुकान छोड़कर दूसरी दुकान से कोई भी सामान खरीदने चला जाएगा और ऐसे ही 10-15 लोगों ने कर दिया तो उसका काम भी धीरे धीरे कम हो जाएगा यानी कि उसके सामान की बिक्री बहुत कम हो जाएगी और उस को नुकसान होने शुरू हो जाएगी।

घमंड का अंत

अगर वह कीमत को बढ़ा के सारी चीजों को भेजता है तो यह उसका घमंड साबित हो सकता है। क्योंकि उसके पास उसका कोई प्रतिस्पर्धी नहीं है अगर होता तो उसको पीछे छोड़ने में उसकी काबिलियत होती।

कभी भी ऐसा नहीं करना चाहिए क्योंकि हम कितना भी घमंड कर ले एक ना एक दिन तो हमारे घमंड का भांडा फूट ही जाता है। तो जब हमारा अच्छा समय चल रहा होता है तब हमें घमंड ना करके सब के साथ बहुत प्यार से पेश आना है।

हमारे उस समय में हमें सब का प्यार पाना है, सबके साथ हमें विश्वास से अपना काम करना है और तब ही हम लोगों का दिल जीत पाएंगे और घमंड को दिल से निकाल पाएंगे।

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