जल्दबाजी करने के नुकसान – short motivational story in Hindi

एक बार गांव में मेला लगा हुआ था। सब लोग अपनी मस्ती में इधर से उधर घूम रहे थे और बच्चे भी खेल रहे थे बहुत अच्छा दृश्य था सब अपने में ही मस्त थे।

मेले में हर एक चीज की दुकान थी सब अपने हिसाब से खरीद कर रहे थे उसी समय एक फोटोस की दुकान में बहुत ही खतरनाक सांप आया और रामू चाचा ने उसको देख लिया। रामू चाचा ने इसको देखने के बाद भी किसी को कुछ भी नहीं बताया क्योंकि अगर वह सब को बताते तो सब डर जाते हैं।

रामू चाचा ने अपने दिमाग का इस्तेमाल करते हैं हुए सांप पर कड़ी नजर रखी और वह क्या कर रहा है कहां जा रहा है वह सब देखते रहे। पर जैसे बस सांप थोड़ा सा आगे गया तो रामू चाचा ने देखा कि एक लड़की मेले में अपनी चूड़ियां लेने में व्यस्त थी और सांप उसी को काटने वाला है यह पता कर लिया।

लड़की को सांप काटे उससे पहले रामू चाचा ने उस लड़की का हाथ पकड़ कर उसे अपने तरफ खींच लिया और लड़की की जान बचा ली। लड़की तो बच गई लेकिन सांप भीड़ का माहौल होने की वजह से फिर से सांप छिप गया।

लड़की को हाथ पकड़ के अपनी तरफ खींचते हुए रामू चाचा को भीड़ में सब लोगों ने देख लिया था और उसी लड़की को पता ही नहीं था कि मुझे सांप काटने वाला था ओर रामू चाचा ने मुझे बचाया।

उसी समय लड़की जो जो सोचे ना लगी बचाओ …… बचाओ…… बचाओ…….

 

मेले में सब लोग देख भी रहे थे और सब ने रामू चाचा को घेर लिया और कहने लगे कि जवान लड़की को छोड़ते हुए शर्म नहीं आती?

रामू चाचा बोलना तो बहुत कुछ चाह रहे थे लेकिन शर्म के मारे कुछ भी बोल नहीं पा रहे थे।

सब सुनने के बाद रामू चाचा की आंख में आंसू हो गए यह सब देख कर मेले के लोग और भी गुस्सा हो गए और कहने लगे कि अब रोने का नाटक कर रहे हो पहले शर्म ही है जवान लड़की को छेड़ते हुए।

रामू चाचा ने कहा वहां सांप था मैं तो बस बचा रहा था। तो गांव वाले बोले यहां सांप कैसे आ सकता है? तुम हमें बेवकूफ बना रहे हो।

गलत काम करने की आड़ में तुम्हें लड़की को छेड़ा है और ऊपर से हमको झूठ बोल रहे हो।

इसी तरह सब गांव वाले मिलकर रामू चाचा के बारे में कुछ भी बोलते रहे और रामू चाचा सिर्फ खड़े-खड़े रो रहे थे।

रामू चाचा रोते हुए बोले मैं ऐसा आदमी नहीं हूं, मेरी बीवी बच्चे हैं, मैं ऐसा कभी नहीं कर सकता, आप सब मुझे गलत समझ रहे हो।

रामू चाचा के बहुत समझाने के बाद भी गांव वालों ने उनकी एक बात भी नहीं मानी और रामू चाचा के ऊपर गंदे गंदे आरोप लगाकर उन को मारने लगे।

रामू चाचा को इतना मारा कि उनके हाथ पाव तोड़ दिए और उनको घर जाने जैसा भी नहीं रखा। उसके बाद सब वहां से चले गए।

फिर कुछ देर बाद फिर से वह सांप बाहर आता है और एक आदमी को काट लेता है और वह आदमी वही तड़प तड़प के दम तोड़ देता है।

यह सब सब गांव वालों ने अपनी आंखों से देखा और उनको पता चला कि यहां हकीकत में सांप है। जब यह पता चला कि यह झूठ नहीं बोल रहा था तो उनको बहुत दुख हुआ।

सब मिल के रामू चाचा के पास गए और उनसे माफी मांगी कि हमसे गलती हुई हमें माफ करो। हमने जल्दबाजी में आपको गलत समझ कर आप को बहुत मारा पीटा और बहुत नुकसान दिया आप हमें माफ करें।

लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था रामू काका के हाथ पाव भी सही से काम नहीं कर रहे थे।

बोध: जल्दबाजी में कोई भी निर्णय ना लें। निर्णय लेने के बदले परिस्थिति को समझे इंसान को समझे फिर निर्णय करें कि क्या सही है और क्या गलत है?

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