जीवन के कड़वे सत्य – jeevan ke kadave saty

  • ईमानदारी से पैसे कमाओ

आपने आजकल ऐसे बहुत सारे लोगों के मुंह से सुना होगा कि ईमानदारी से जियो इमानदारी से रहो इमानदारी से खाओ पियो और मस्त रहो।

क्या यह हम सब ने अपने जीवन में उतार दिया है क्या हम इस तथ्य को अपने जीवन में अनुसरण कर रहे हैं नहीं ना?

यह भी एक कड़वा सत्य है।

आपने ऐसे बहुत से लोग देखिए होंगे कि जो लोग ईमानदारी का पाठ पढ़ाते सबको और वह खुद ही वह ईमानदारी से अपना जीवन जी रहे होते हैं यानी कि जिस चीज पर उनका हक नहीं है यानी कि जो चीज उन्होंने बोली थी और वह कर ही नहीं है तो उसको एक तरफ से बेईमानदारी ही कही जाएगी।

ईमानदारी एक ऐसा गुण है जो इतनी संस्था से हर किसी के अंदर नहीं आता और अगर किसी के अंदर इतनी सहजता से यह गुना भी किया तो उसको अंत तक कोई भी निकाल नहीं सकता है और जिसने इस गुण को धारण कर लिया वह जीवन में दुख का सामना बहुत कम करता है।

  • कभी जूठ मत बोलो / सत्य की रह पर चलो

आपने अपने किसी रिश्तेदार के मुंह से या फिर अपने ही घर के कुछ लोगों से के मुंह से हमेशा सोना होगा कि कभी भी झूठ मत बोलो, हमेशा सत्य की राह पर चलो।

लेकिन क्या कभी आपने उनको यह सब करते हुए देखा है? यानी कि कभी झूठ ना बोला हो या फिर सत्य की राह पर ही चलते हो। और अगर देखा भी होगा तो भी बहुत कम। 100 में से एक बंदा ऐसा होता है जो कभी झूठ नहीं बोलता और हमेशा सत्य की राह पर चलता है।

कभी झूठ नहीं बोलना और सत्य की राह पर चलना यह भी एक आम आदमी के लिए एक पत्थर तोड़ने वाली बात है यह इतना सहज नहीं है जितना बोला जाता है।

सत्य और झूठ यह दोनों एक दूसरे से इस तरह से जुड़े हुए हैं जैसे रात और दिन किसी भी इंसान के जीवन में यह दो चीजें जरूर होती है उसने जीवन में एक ना एक बार तो जरूर झूठ बोला ही होता है।

इसीलिए जो लोग बोलते हैं वह कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इस बात को कर पाते हैं। यह भी एक जीवन की कड़वी सच्चाई है कि बोलते तो सब है लेकिन उसका अनुसरण कोई नहीं करता।

  • शरीर विनाशी है

ऐसी आपने ऐसे बहुत से लोगों को देखा होगा जो अपने ऊपर अपने शरीर को अच्छे से अच्छा बनाने के लिए बहुत सा खर्चा करते हैं बहुत सा समय निकाल कर मतलब उसके लिए इतना कुछ करते हैं जितना शायद वह किसी और के लिए करें तो उसको अगले जन्म में कभी भी शरीर का दुख मिलेगा ही नहीं।

वह ऐसे समझते हैं कि हमारा शरीर कभी बुरा नहीं होगा कभी मरेगा नहीं कभी हमें कुछ होगा भी नहीं और ना हम कभी बीमार भी होंगे।

लेकिन ऐसा नहीं है इस सृष्टि पर इस पृथ्वी पर जिसने भी जन्म लिया है उसको एक ना एक दिन मरना जरूर है। यह भी एक बहुत कड़वा सत्य है जिसको लोगों को स्वीकार करने में पता नहीं बहुत समय लगता है शायद कुछ लोग तो जीवन के अंत के दिन में इस चीज को स्वीकार करते हैं नहीं तो वह स्वीकार ही नहीं करते हैं।

हमेशा ऐसा ही लगता रहता है कि नहीं अभी सब ठीक हो जाएगा मुझे कुछ नहीं होगा मैं बहुत ठीक हूं, हां अपने आप को ठीक करने के लिए यह पॉजिटिव थिंकिंग अच्छी बात है लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती है जिसको हम बदल नहीं सकते हैं उनको हमें सिर्फ स्वीकार ही करना होता है।

  • कर्म का फल

कर्म का फल होता भी है ऐसा कुछ लोग मानते भी नहीं है।

लेकिन यह बात सत्य है कि इस पृथ्वी के सहारे मनुष्य को अपने जीवन में जो कुछ भी प्राप्त होता है अच्छा या बुरा खुशी या गम उसको सब कुछ अपने कर्मों के फल के हिसाब से ही मिलता है।

अगर उसने किसी को खुशी का एहसास कराया होगा यानी कि किसी को भी खुशी दी होगी तो उसको भी जीवन में खुशी मिलेगी या फिर उसको भी जीवन में खुशी दे लाने वाला कोई ना कोई जरुर मिलेगा।

कुछ लोग अपने देखेंगे को अपने जीवन में दान धर्म ऐसा आदि बहुत करते हैं वह लोग इस बात को अच्छी तरह से की जान चुके होते हैं कि अगर हम आज किसी के कुछ मदद करेंगे तो शायद अगले जन्म में हमारी परिस्थिति पता नहीं कैसी हो तो हमें कोई मदद करेगा हम दुख दुविधा में नहीं रहे ताकि हमें अच्छा सुकून मिले।

वैसे भी जितना हम किसी की मदद करेंगे उतना ही भगवान हमें जीवन को अच्छे से जीने की शक्ति देता है ताकि हम जीवन को अच्छे के रूप से और हमेशा सच्चाई के रास्ते से जीवन को जी सकें।

जितना हो सके उतना हमें अच्छे कर्म करने चाहिए ताकि हमें हमारे शरीर में कोई भी समस्या आदि ना हो और अगर हो तो इतनी भी गहरी ना हो जो ठीक हो ना सके हमारे शरीर में एक-एक जो चीज होती है वह सब हमारे कर्मों के फल के हिसाब से ही होती है कुछ ऐसे साइंस है जो आजकल के लोगों ने साबित कर दिया है कि ऐसा है लेकिन कम है लेकिन होता जरूर है।

सत्य को इस कड़वे सत्य को मानने वाले लोग मानते भी है और कुछ नहीं भी मानते हैं सबकी अपनी-अपनी सोच है।

  • समय का सदुपयोग

समय का सदुपयोग की परिभाषा खास करके आजकल के नौजवानों में बहुत कम पाई जाती है।

उनका मानना यह है कि अभी तो बहुत टाइम है हम बाद में भी कर लेंगे।

अगर हम किसी स्टूडेंट की बात करें की एग्जाम है अभी से पढ़ाई की तैयारी करें तो उनका मानना ऐसा होता है कि अभी एग्जाम को 6 महीने हैं बाद में भी हम तैयारी कर सकते हैं।

धीरे-धीरे करके 3 महीने बाकी होते हैं फिर उनके फैमिली मेंबर्स उनको कहते हैं कि 3 महीने ही बाकी है पढ़ाई कर लो तब भी वह लोग ही जवाब देते हैं कि नहीं अभी तो 3 महीने और बाकी है।

फिर ऐसे करते करते जब समय नजदीक आ जाता है तब उनसे यह चीज सहज स्वीकार ही नहीं हो पाती कि अब एग्जाम में इतना ही समय है हमें पढ़ाई करनी ही है।

परंतु बहुत मुश्किलों के बावजूद भी वह मेहनत नहीं कर पाते और परीक्षा में असफल होते हैं उसके बाद उनको एहसास होता है कि हमें समय का सही सदुपयोग करके पढ़ाई कर लेनी चाहिए थी और अगर हम पढ़ाई कर लेते तो आज हमारे सामने यह समस्या ना आती।

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