क्या भगवान ने सबको स्वार्थी बनाया है?

सबके मन में एक बार तो यह सवाल जरूर आया होगा कि भगवान ने सब को स्वार्थी बनाया है? क्या पूरी दुनिया मतलबी है? क्या मनुष्य इतना स्वार्थी हो सकता है? क्या प्यार भी स्वार्थी हो सकता है? क्या पूरी दुनिया स्वार्थी है?

यह सवाल मन में आना एक आम बात है लेकिन यह सच नहीं है। भगवान ने किसी को भी स्वार्थ नहीं बनाया है भगवान ने तो सबको बराबर दिमाग दिया है बस हमारा उपयोग करने का तरीका अलग होता है।

स्वार्थी किसे कहते हैं

भगवान ने सब को बहुत अच्छा बनाया है, अच्छा दिमाग अच्छा जीवन, अच्छा भोजन और भी बहुत कुछ अच्छा-अच्छा दिया है। हमें हमारी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वार्थ करने की आवश्यकता करनी पड़ती है।

दरअसल मनुष्य का स्वार्थ दो हिस्सों में है 1 प्राकृतिक स्वार्थ और 2 अप्राकृतिक स्वार्थ। यह दोनो स्वार्थ जीवन में हर जगह कहीं ना कहीं पाए जाते हैं, तो दोनों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

#1 प्राकृतिक स्वार्थ

जन्म से लेकर जब तक हमारी शादी नहीं हो जाती है तब तक हमारी जिम्मेवारी हमारी मां बाप के ऊपर होती है। और हमें भी उनकी जरूरत होती है तो इसमें हमारी सेवा को लेकर के हम भी स्वार्थी ही साबित हुए। क्योंकि जब समझदार हो जाएंगे तो शादी करके अपनी बीवी के साथ रहेंगे और अपने मां-बाप को अकेले छोड़ देते हैं ऐसा अक्सर आजकल की सोसायटी ओं में पाया जाता है।

तू यहां पर जन्म से शादी तक के सफर में मां-बाप की जरूरत होती है हम यहां पर स्वार्थी बने। और यहां हम नहीं सब ऐसे ही करते हैं तो स्वार्थी बना तो हे ही यह एक आम बात है। प्राकृतिक स्वार्थ जो सब करते हैं इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।

ऐसे और भी रिश्ते हैं जीवन में जो प्राकृतिक स्वार्थ से जुड़े हैं अगर ऐसा नहीं होता तो कोई भी बच्चा बड़ा कैसे होगा? अगर इन सब बातों को सहज ही स्वीकार नहीं करते हैं तो हमारे दिल दिमाग में तरह-तरह के सवाल उठते हैं और हम और भी टेंशन में डूबते जाते हैं तो हमें इसे सहज स्वीकार कर लेना ही हमारे लिए बेहतर है।

#2 अप्राकृतिक स्वार्थ

स्वार्थ की यही रीत है कि खुद के कार्य में सफल होने के बाद उसी कार्य में मददरूप होने वाले सभी को भूल जाते हैं और फिर खुद स्वार्थी का टैग लेकर घूमते रहते हैं।

यहां पर दुनिया के ऐसे लोगों का समावेश होता है जो मतलब निकल जाने पर हमें छोड़ कर चले जाते हैं और फिर कभी गलती से सामने भी आते हैं तो इस तरह से हमारे साथ बर्ताव करते हैं कि जानते ही नहीं है कि हम कौन हैं या हम कभी उससे पहले मिले थे।

जो स्वार्थ में या स्वार्थ की खातिर करना जरूरी नहीं है और बहुत लोग करते हैं एक दूसरे को छोड़ कर चले जाते हैं।

स्वार्थी जीवन

हमने यह अनुभव भी किया होगा कि जिनके लिए हम हमेशा तैयार रहते हैं मदद करने के लिए, पर हमारे बुरे समय पर वही हमारे मदद करने के लिए नहीं आते हैं। हम उनके हर दुख में मदद करते हैं अगर उनको किसी भी चीज की जरूरत हो तब भी हम वह लाकर उसे देते हैं, लेकिन जब हमें उनके सहारे की जरूरत होती है तब हमारी मदद नहीं करते हैं और अंत में दुख तो बहुत ही होता है और कुछ कर भी नहीं सकते।

स्वार्थी लोग

ऐसी परिस्थितियों के दौर में गुजरने से हमें यह मन में सवाल आता है कि क्या भगवान ने सब को स्वार्थी बनाया है?

सब इतने स्वार्थी नहीं होते हैं, जो सिर्फ अपने बारे में सोचें। अगर ऐसा होता तो आज यह दुनिया चल रही है वह चल नहीं पाती। आजकल लोगों की मदद के लिए बहोत संस्थाएं भी काम कर रही है और कुछ लोग गरीब और बेसहारा लोगों को कपड़ा रोटी और मकान की जरूरतें भी पूरी कर रहे हैं।

ऐसे भी लोग हैं जो किसी को कुछ भी बिना बताए लोगों की मदद करते हैं क्योंकि वह नाम की महिमा नहीं चाहते हैं और ऐसे लोगों को हम स्वार्थी भी नहीं कर सकते क्योंकि वह दूसरों के लिए खुद की धन संपत्ति को खर्च करता है।

खास बात यह है कि जब तक हम किसी को पूरी तरह से जान नहीं लेते हैं तब तक हम किसी को स्वार्थी नहीं बोल सकते हैं, ऐसे लोग हमारे आसपास ही होते हैं और हम उनको पहचानने में गलती कर देते हैं और वह हमारा नुकसान है। शायद वह हमारे नजदीकी रिश्तेदार भी हो सकते हैं।

आज के समय में सबको स्वाति बना दिया है लेकिन हमें खुश होना चाहिए कि चलो कुछ तो लोग हैं जो किसी ना किसी तरह से दूसरों की मदद के लिए हमेशा आगे आते हैं वह भी बिना किसी स्वार्थ से।

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