पुण्य जीवन कौन जी सकता है – puny jeevan kaun jee sakata hai

पुण्य जीवन जीने के लिए मनुष्य को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। पुण्य जीवन यानी के आज के दुनिया के हिसाब से बताया जाए तो जिसके पास सारा सुख है वह एक पुण्य जीवन जी रहा है ऐसा माना जा सकता है।

पुण्य जीवन जीने के लिए हमें पुण्य कर्म करने होते है। और पुण्य कर्म करने के लिए हमारे पास धन-संपत्ति होनी चाहिए ऐसा आजकल के लोगों का मानना है। लेकिन यह सच नहीं है। सच कुछ और ही है।

पुण्य कमाने के इस दुनिया में बहुत रास्ते हैं ऐसा जरूरी नहीं है कि सिर्फ पैसों से ही हम पुण्य कमा सकते हैं। पुण्य कमाना यानी कि किसी की मदद करना उसकी आवश्यकता के अनुसार।

पुण्य जीवन

आजकल के जो इंसान हैं वह पुण्य कर्म  करने में बहुत कम रुचि रखते हैं। उनको तो शायद यह भी पता नहीं होगा कि पुण्य क्या है? हां उनको यही चीज आज की भाषा में बोले कि सुख क्या है तो वह तुरंत समझ जाते हैं।

अगर पुण्य का उदाहरण देखने हो तो बहुत पुराने समय के भारत के जो ऋषि मुनि थे उनको जीवन की कथाएं सुनिए। क्योंकि उन्होंने अपने जीवन में जो दान धर्म और पुण्य आदि किए हैं।

आज के समय में शायद ही कोई कर सकता है, क्योंकि वह जो समय था, वहां जो गुरु थे जो शिष्य को शिक्षा देने वाले उनकी बात ही कुछ अलग थी। वह अपने शिष्य को जो भी ज्ञान देते थे वह सबसे उच्च कोटि का ज्ञान था।

वह ज्ञान आज के इस दुनिया में कहीं भी वह ज्ञान मिलना बहुत ही मुश्किल है। उस समय के आम इंसान भी इतने अच्छे थे की सभी से प्यार से आपस में एक रहे कि सबकी मदद करने में कभी भी पीछे नहीं हटते थे।

पुण्य क्या है?

असली पुण्य जीवन तो वही जी रहे थे जो सबका भला करते थे और खुद भी अच्छे भले रहते थे। जीवन में कभी किसी का बुरा नहीं किया है, वह पुण्य जीवन का अनुभव कर सकते हैं।

आज के समय में पुण्य जीवन जीने के लिए एक ही बात का ध्यान रखना है। कभी भी किसी को भी हमारे द्वारा कोई भी दुख या नुकसान पहुंचे हमें ऐसा कोई भी काम नहीं करना है। जितना हो सके सब को खुशी देने हैं, दुआएं देनी है। सब के प्रति प्यार दिखाना है, कभी भी किसी के प्रति गुस्सा या नफरत बिल्कुल भी नहीं दिखानी है। कोशिश यही करनी है की हमसे जितना हो सके सबका अच्छा करना है।

इतनी कोशिश करने के बाद आपके जीवन में परिवर्तन अपने आप ही आता जाएगा। अगर हम किसी को कुछ मदद करते हैं तो सीधी बातें हमें भी कोई न कोई मदद करेगा। आजकल की जीवन का अनुभव आप सब ने किया ही होगा।

आज के समय में कुछ लोग पुण्य कमाने के लिए अपनी धन संपत्ति में से कुछ हिस्सा निकालकर वृद्धाआश्रम या फिर कुछ गरीब लोगों में बांटते हैं। कुछ लोग हर महीने जो झोपड़ी वाले लोग को अन्न दान करते हैं, ताकि उनको अपने जीवन का गुजारा करने में कम तकलीफ पड़े और दान करने वाले को पुण्य मिले तो यह भी एक जरिया है पुण्य कमाने का।

पुण्य कमाने के लिए हमें जहां पर, जिस किसी को जिस भी चीज की जरूरत है अगर हम वहां उसको सहयोग करते हैं यानी कि उसको थोड़ी सी भी मदद करते हैं तो भी यह एक पुण्य कहलाएगा।

यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि हम किसी को भी सिर्फ पैसों से ही मदद कर सकते हैं, या धन-संपत्ति से ही मदद कर सकते हैं। आजकल मदद करने के लिए हमारे दिल में सबके प्रति शुभ भावना और शुभकामना होना भी पुण्य कमाना के बराबर है।

क्योंकि आजकल हर कोई दूसरे के प्रति शुभ भावना और शुभकामना रख नहीं सकता है। यह जो टेक्नोलॉजी का जमाना आ गया है इस टेक्नोलॉजी में हर कोई सुखी होना चाहता है। कोई भी यह नहीं सोचता कि चलो वह सुखी होगा तो मुझे भी अच्छा भी लगेगा यानी कि दूसरे की खुशी में खुद की खुशी कभी भी महसूस नहीं करते हैं।

पाप और पुण्य क्या है?

हमारे नजरों में देखा जाए तो धर्म और अच्छाई का क्या अर्थ हो सकता है? जिस काम से दूसरों को संतुष्टि मिलती है वह हमारी इमानदारी है और किसी जरूरतमंद की सहायता करते हैं या उनको देना भी एक अच्छाई है। उधर दिल से ऐसी चीजें करना चाहिए ताकि हम से कभी भी कोई दुखी ना हो। कम से कम हम जितने लोगों की मदद कर सकते हैं या जिस भी तरह से मदद कर सकते हैं हमें उनकी मदद जरूर करनी चाहिए।

हम अक्सर उन लोगों को पाप और नैतिकता पर चर्चा करते हुए देखते हैं। सच कहा जाए तो वह बातों का कोई भी सामान्य अर्थ नहीं है।

पुण्य और पूजा हमारे घर को जीवंत बनाती है। घर की सभी सीमा जीवित होती है। आप अपने घर में रहते हैं तो यही चाहेंगे कि स्नेह और प्रकाश से भरे रहे और सबसे बड़ी बात यह है कि सबके साथ मिलजुल कर खुशी से रहें ना कि किसी का भी दिल दुखा कर।

हमारे जीवन में पुण्य कर्मों की वजह से ही हमें सुख मिलता है यह सनातन सत्य है। कुछ लोग यह समझते हैं कि बड़े पैसे वालों के घर पर जन्म लेने से ही हम पुन्यवान कहलाते हैं। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है। तुमने अपने पिछले जन्म में अगर दान पुण्य बहुत अच्छे से किया होगा तो तुम्हें अमीरों के घर जन्म अन्ना लेने के बाद भी तुम्हारे ओरिजिनल घर में ही सारी सुख संपत्ति मिल सकती है।

अगर हमने पिछले जन्म में कंपनी किए है या फिर यह भी कर सकते हैं कि पुण्य ही नहीं किए हैं तो हमें इस जीवन में सुख के नाम पर सिर्फ सपने ही सजाने पढ़ते हैं क्योंकि सुख पाने के लिए भी सुख देना पड़ता है। वह कहते हैं ना कि जैसी करनी वैसी भरनी।

अगर पिछले जन्म में अच्छा कर्म किया होगा, भोजन पानी या और भी कोई अच्छा दान पुण्य किया होगा तो दूसरे जन्म में आपको यही सुख वापस मिल जाता है। जो कि आपने औरों को दान में दिया था। अगर आपको कम सुख मिला है तो इसका मतलब यह है कि आपका पिछले जन्म का खाता ही खाली था और इसको भरने के लिए एक रास्ता भी है।

सुख पाने का यही एकमात्र रास्ता है कि हमसे जितना हो सके उतना दान पुण्य की जाए गरीबों और बेसहारा लोगों की मदद की जाए। जब आप से मदद लेने के बाद खुश होता है कोई भी व्यक्ति तो उसके दिल से दुआ अपने आप ही निकलती है कि भगवान आपका भला करें।

बस। हमें जीवन में सुखी होने के लिए इतनी दुआ काफी है अगर यह दुआ हमें दिन में एक बार हर रोज मिलती रहे तो हमारे जीवन में सुख नहीं आने के लिए कोई रास्ते बचेंगे नहीं।

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