वर्षा ऋतु के समय की बचपन की यादें – Varsha rutu kee yaaden

हम कहीं पर भी रहे, किसी भी देश में रहे पर सभी देश की अपनी कुछ अच्छाइयां होती हैं। कुछ यादें होती हैं। ऐसे ही भारत जैसे देश में बहुत सारी ऋतु है। उनमें से एक है वर्षा ऋतु। जब यह वर्षा ऋतु आती है तो अपने साथ बहुत सारी यादें भी लेकर आती है। बहुत सारी बचपन की यादें।

जब हम छोटे थे, तो हम वर्षा ऋतु की आगमन का इंतजार करते थे जैसे ही वर्षा ऋतु का में पता चलता था तो सबसे पहले हमारे दिमाग में यही आता था पकोड़े और चाय। आप समझ ही गए होगे बचपन में कैसे सब लोग मिलकर छत पर जाते बारिश का आनंद लेते।

बारिश के मजे के साथ साथ हम पकोड़े और चाय खाते थे सबसे पहले तो हम पता चलता कि बारिश आने वाली है कागज की नाव बना देते थे। बारिश में कागज की नाव जिसको हम बोट भी कहते हैं। वह बनाते थे।

वर्षा ऋतु के लाभ

वर्षा ऋतु में जैसे ही एक जगह पानी इकट्ठा हो जाता था और थोड़ा पानी हम भरते थे तो उस पर कागज की नाव चलाते थे। सब दोस्त मिलकर बारिश का आनंद खूब लेते थे।

वर्षा ऋतु में खुले आसमान के नीचे कभी गाना गाते तो कभी नाच कर लेते थे।आजकल के बच्चे की वर्षा ऋतु में ध्यान बहोत कम देते है ओर ना वह किसी ऋतु को इंजॉय करते हैं। मगर पहले के समय में वर्षा ऋतु को इतने अच्छे से इंजॉय करते थे। कि वह आज भी सब की यादों में सी हुई है।

पहले की परिवार बहोत बड़े होते थे, इतना बड़ा होता था कि सब लोग मिलकर इतना आनंद करते थे। वर्षा ऋतु में मम्मी पकोड़े बना रही है हमारी चाची चाय बना रही है। और बच्चे और बाकी जो परिवार के लोग होते थे वह सब लोग छत पर जाकर बारिश के मजे लेते थे फिर घर से आवाज आती थी पकोड़े बन गए हैं चाय बन गई है सब आ जाओ।

सब मतलब इतनी अच्छी यादें थी हमारी जो आजकल के फैमिली में हमें देखने को नहीं मिलती है। क्योंकि आजकल फैमिली में गिने-चुने 3 लोग होते हैं या 4 लोग होते हैं। पहले की फैमिली इतनी बड़ी होती थी कि सबके साथ बैठकर बारिश के मजे हम लोग लेते थे।

वर्षा ऋतु पर कविता

उसके साथ साथ दादा जी के साथ बैठकर कहानियां सुनना बारिश अगर रात को होती थी तो दादा जी हमें कहानियां सुनाते थे बारिश में कहानी सुनना वह बिजली की गड़गड़ाहट से डर जाकर जाते थे तो हमारा ध्यान हमारे बड़े रखते थे।

आज के समय में यह चीजें बहुत कम देखने को मिलती है। पहले का समय बहुत ही अच्छा था। पहले की बात ही अलग थी। पहले बड़े छोटे को समझते थे और छोटे बड़ों को समझते थे। आजकल तो कुछ लोग अपने संस्कार की वजह से छोटे बड़े की इज्जत नहीं करते है।

आजकल सब लोग अपने में ही रहना चाहते हैं। मगर जैसी बड़ी फैमिली होती थी या ने बड़ी परिवार होता था तो उसमें हमें दर्द तकलीफ कोई भी आती थी तो हम उससे मिलकर झेल लेते थे। खुशी में डबल खुशी हो जाती थी और गम बट जाता था जिससे कि इतना दुख नहीं होता था।

वर्षा ऋतु का महत्व

जैसे की बारिश का समय इतना खुशी वाला समय होता था ना, मतलब आप मानोगे नहीं।

वह एक एक समय हमें याद है उस टाइम पर हम लोग एक गाना बहुत गुनगुनाते थे मिलकर वह कौन सा गाना था सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना है। यह गाना ऐसा गाना था जो जो वर्षा के समय हम गाते ही थे।

एक गाना तो सबसे अच्छा गाना था कौन सा? कोई लड़की है जब वह गाती है बारिश होती है गुमर गुमर गुमर गुम गुम। यह वाला गाना। यह गाना इतना गाते थे। जब भी बारिश में हम लोग नाते थे यह गाना जरूर गाते थे

मजे वाली बात तो यह हे की बारिश में नाच कर अंताक्षरी भी हम लोग खेलते थे। बारिश में ही बारिश को इंजॉय करते थे। आजकल तो बारिश में लोग नहाने से डरते हैं। ठंड लग जाएगी बुखार हो जाएगा बीमार हो जाओगे ऐसी बातें सब लोग बोलते हैं। यह बात कुछ हद तक सही भी है।

मगर पहले तो लोग ही कहते मतलब बड़े ही कहते थे कि चलो चलो बारिश के मजे लेते हैं यानी इंजॉय करते हैं। और आज के समय में बच्चों को बारिश से दूर रखा जाता है।

बारिश में मजे करना यानी कि एक तरह से भगवान हमें बोल रहा है कि आज वह बहुत खुश है। बारिश का मतलब यह हम कह सकते हैं कि धरती माता को भी मेरे ठंडे की जरूरत है, भगवान यह कह रहा है कि धरती को भी पानी की जरूरत है।

वर्षा ऋतु से लाभ और हानि

उसमें पानी की जो कमी है हो गई है उसे मैं पूरी कर रहा हूं मगर हमारी कई कारणों की वजह से धरती को बहुत प्रॉब्लम होने लगी है, बहुत मुश्किलों का सामना भी करना पड़ रहा है। इसलिए मैं यह बात कह रही हूं कि उस समय में पानी कितनी दिक्कत नहीं थी आज के समय में है।

क्योंकि लोग पानी वेस्ट यानी बिगाड़ ज्यादा करते हैं। बातें भी हो चुकी हैं के अच्छी तरह से उपयोग करो। जैसे बहुत जरूरी हो इतना ही पानी उपयोग करते थे। बर्बाद नहीं करते थे। जैसे आज के टाइम के लोग करते है।

आपने देखा होगा पहले के राजा महाराजा वर्षा ऋतु के आने से पहले आगमन के समय से पहले ही तैयारी करते थे कि पानी जमा करके रखते थे। वर्षा ऋतु की आगे उनको प्रॉब्लम ना हो। अपने घर में बारिश के पानी को जमा कर सकते हैं। बचा सकते हैं।

हम बारिश के पानी को बचाते भी थे कहीं से कई टब में भर लेते थे, घर दो बाल्टी पानी
बचा लिया हे तो उससे घर साफ करना ठीक है। उसे खा लेना गर्म करके गर्म करके उसको नहाने में यूज कर लेना और बहुत सारी बातें तो इन बातों पर हमें गौर करना चाहिए।

यह देखना चाहिए कि हम से हमारे बच्चे सीखें की वर्षा ऋतु का आनंद कैसे लिया जाए। और पानी को कैसे बचाया जाए? क्योंकि आने वाले समय में पानी की दिक्कत और बढ़ती जाएगी इसीलिए हमें सब को समझाना है कि वर्षा ऋतु का आनंद लेने के साथ-साथ उसे बचाना भी सीखी।

अपनों को समझाइए कि वर्षा ऋतु का पानी बर्बाद ना होने दें उससे भी बचाना सीखे। बचपन की यादों के साथ यह भी ध्यान रखें वर्षा ऋतु में बोट बनाना ना भूले आज भी अपनी यादें ताजा करें।

सब को महत्व बताएं वर्षा ऋतु का यह हमारे लिए बहुत जरूरी है क्योंकि वर्षा ऋतु का जल चक्र भी आपको पता होगा मुझे ऐसा लगता है कि वर्षा ऋतु कैसे यानी कि बादल में पानी कैसे आता है? क्योंकि यह सब तो हमने पढ़ाई हुआ है कि सूरज की किरने पर पड़ती है।

समुद्र से पानी भाप बनकर बादल बनता है वह जाकर सब जगह बरसता है तो उस समुद्र का पानी भगवान हमें ताज़ा कुदरती साफ करके देता है। यानी कि पानी को साफ करके देता है खारे पानी को साफ कर देता है तो नेचुरल फिल्टर हुआ।

आप कोशिश करें कि वर्षा ऋतु के आनंद के साथ साथ बचपन की यादें भी ताजा करें और वर्षा ऋतु का पानी बचा सके।

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